पहला कदम

जब भी मै किसी घटना से प्रभावित होता हूँ तो सोचता हूं कि मैं कुछ कहु या लिखु, इस बात पर मै भी अपनी राय दू, मन में मैं कुछ लिख भी लेता हूँ लेकिन उसके आगे नहीं हो पाता कुछ,  फिर वो बात कहीं खो जाती है।

जब मै किसी व्यक्ति विशेष के बारे में कुछ जानकारी इकट्ठी करता हूं या पढता हूँ तब मैं सोचता हूँ कि इस जानकारी को मैं शेयर करू, पर ऐसा करने के पहले ही वो जानकारी दिमाग से गायब हो चुकी होती है। 

किसी कला से संबंधित जैसे कुकिंग,  गार्डनिंग या किसी अन्य विषय पर कुछ आइडियाज मन में आते हैं जो शेयर किये जाने चाहिए पर वो हो नहीं पाता। 

रोजमर्रा जीवन में कई तरह की समस्याओ का हम सामना करते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं,  कभी कभी लगता है कि जिस तरीके से मैने मैनेज किया वो सभी लोगों से शेयर करना चाहिए। 

दिल्ली की बात दिल में ही न रह जाये, इसलिए अच्छा है कि उसे लोगों के साथ शेयर कर लिया जाए। बहुत सी चीजें हैं जिनके बारे में हम अक्सर सोचते हैं पर पूरी जानकारी नहीं है , ऐसी कोई बात अगर मै किसी तक पहुंचा सका तो ये सफलता होगी मेरी।।।

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धोनी का एक भक्त


मैं भी किसी का भक्त हुँ पक्का वाला पर वो कोई राजनेता नहीं,  मैं भक्त हुँ महेन्द्र सिंह धौनी का। जी हां आप फैन भी कह सकते हैं पर आज के समय के हिसाब से भक्त शब्द परफेक्ट है। मेरे विचार से भक्त शब्द के मतलब उससे है कि जिसकी आप भक्ति करते हैं उसकी आप बुराई या आलोचना सुन न सके। मेरे साथ भी ऐसा ही है पर धोनी की आलोचना करने वालों को मैं ढोंगी और मुर्ख मानता हूँ। 

सचिन अगर भगवान हैं तो धोनी किसी देवदूत से कम नहीं,  अगर टीम इंडिया पांडव की सेना हैं तो धोनी उसके कृष्ण है, अगर टीम इंडिया दूध है तो धोनी मलाई है। अगर कोहली टीम के कप्तान हैं तो वही धोनी मैदान में कीपर,कोच और मेंटर की भूमिका में नजर आते हैं। धोनी की योगदान को आप सिर्फ रन से नहीं माप सकते।

चलिये बात करते हैं कुछ पीछे से,  कुछ क्या इस सदी के शुरुआती वर्षों से। ये वो दौर था जब अगर 4-5 विकेट गिर गये तो लोग समझ जाते थे कि मैच तो गया, उस समय विकेट कीपर मतलब कीपर ही होता था जो 20-25 रन बना दे तो बहुत होता था वैसे राहुल द्रविड़ को जबरदस्ती कीपर बनाया गया था कुछ सालों तक।2000-2004 भारत ने कई विकट कीपर आजमाये पर कोई ठीक से टिक नहीं पाया।  धोनी को जब पहली बांग्लादेश के खिलाफ खेलते देखा तो लगा कि बस यही है जिसकी हमें तलाश है, लम्बे बालों में वह बहुत स्टाइलिस्ट दिखते थे,  मैं पहले मैच से ही यह कामना करता था कि इसके रन बनने चाहिए, शुरूआत की पारियों में तो ये न हो सका लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ अपने 5वें वनडे में उन्होंने बताया दिया कि वो क्या हैं। 

जब तक लोग ये जान पाते, समझ पाते कि धोनी कौन है, कहा का है कैसा खेलता है तब तक धोनी टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की कर चुके थे,  ऐसे खिलाड़ी अक्सर महानता को प्राप्त करते हैं जो करियर के शुरुआती दौर से ही जगह पक्की कर लेते हैं। धोनी की बैटिंग कलात्मक तो नहीं है लेकिन वह बेहद स्मार्ट बल्लेबाज हैं जो अपना विकेट गवाना नहीं चाहते यही कारण है कि नाबाद रहने का कीर्तिमान भी उनके ही पास है। उनका पहला लक्ष्य होता है कि वो 45 ओवर तक टिके रहे, फिर वो अपना हाथ खोलते हैं। 

धोनी की एक और बात मुझे खास लगती है वो है उनका स्वार्थ से परे होना है,  जब वो कप्तान थे वो चाहते तो तीसरे या चौथे नंबर पर उतरकर बैटिंग कर सकते थे एसा करते तो निश्चित ही उनके आज 12-13 हजार रन पूरे हो चुके होते पर उन्होंने नये खिलाड़ियों में भरोसा दिखाकर उन्हें ऊपर खिलाया, वैसे मै बहुत उत्साहित हूं कि जल्द ही वो 10000 रन वाले क्लब में शामिल हो जायेंगे,  संभवतः वह उस क्लब के एकमात्र सदस्य होंगे जिसने 5-6 नंबर पर बल्लेबाजी  इतने रन बनाए हैं। वैसे अगर धोनी की बैटिंग,  कीपिंग व कप्तानी के आंकड़ों की बात की जायेगी तो कई पेज भर जायेंगे।

आस्टेलिया के खिलाफ पिछले मैच में हमने देखा कि कोहली बाउंड्री के पास फील्डिंग करने रहे हैं,  ऐसा तभी हो सकता है जब आपकी टीम में धोनी जैसा खिलाड़ी हो, दरअसल उस समय आधी कप्तानी धोनी कर रहे थे। पिछले दशकों में टीम में कभी ऐसा नहीं देखा गया कि कप्तान व पूर्व कप्तान इतने कूल तरीके से टीम को सम्भाल रहे हो। दरअसल धोनी का कप्तानी छोड़ना एक मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ,  एक तरफ जहां धोनी पर से दबाव है गया वही उनका अनुभव कोहली के काम आ रहा है,  इस तरह टीम के पास दो कप्तान हैं।  फील्ड प्लेसमेंट व गेंदबाजों से बातचीत धोनी ही ज्यादा करते हैं। DRS का तो मतलब ही Dhoni Review System हो गया है। 

मेरी दिली इच्छा है कि धोनी इंग्लैंड में होने वाले 2019 विश्व कप के पहले ये घोषणा कर दे कि विश्व कप का फाइनल मैच  उनके करियर का अंतिम मैच होगा, और फाइनल मैच में जब इंडिया जीते तो मैदान पर धोनी विजयी शाट मारे, छक्कों हो तो सोने पे सुहागा।। जब मैं 60-70 साल का हो जाउँगा तब मेरे व्यक्तित्व जीवन के अलावा धोनी से जुड़ी हुई बातें मैं अपने बच्चों के बच्चों को बताउंगा। 

हिन्दी दिवस पर

आज मैं हिन्दी दिवस पर एक बात सोच रहा कि जब हम छोटे थे तो कभी ये पता न चला कि हिन्दी दिवस कब आयी और चली गयी, कभी हमारे स्कूल में हिन्दी दिवस मनाया नहीं गया न सुना कि किसी और दोस्त के स्कूल में मनाया गया। अब जब कुछ साल से जब से हम बड़े हो गये काम धन्धा करने लगे तब से ही ज्यादा सुनने में आ रहा है।  मैने कभी जानने की कोशिश तो नहीं की पर क्या अभी भी हमारे स्कूलो मे हिन्दी मात्र एक विषय है या उससे कुछ ज्यादा, देखने वाली बात होगी। 

हिन्दी भाषी राज्य होने के कारण मेरी बोलचाल की भाषा तो हिन्दी ही रही पर जब अलग से हिन्दी के बारे में सोचते हैं तो हिन्दी में कम आने वाले नंबर ही याद आते हैं,  पता नहीं क्यूँ मुझे हिन्दी मे अंग्रेजी की तुलना में कम अंक आते थे।  मुझे कवितायें,  दोहे, अलंकार ठीक से आते ही नहीं थे, एक बार हिन्दी के जब मासिक परीक्षा मौखिक हुए तो मेरी नानी याद दिला दी मैडम ने। बहुत बेज्जती हुई भाई 30 में सिर्फ 10 अंक मिले। फिर भी हाई स्कूल व इंटरमीडिएट में 60 से ऊपर ही नंबर आये पर अंग्रेजी से कम।

अब जब बड़े हुए तो समझ में आता है कि हिन्दी सिर्फ एक विषय नहीं है यह इतने बड़े देश को जोड़ने वाला सूत्र है, और सबसे विशेष बात यह कि इस सूत्र में अन्य भाषाओं के रूप में बहुमूल्य मोतियों को पिरोया गया है जो इसे अलग व खूबसूरत बनाता है। हिंदी में भारतीय भाषाओं के मिलान के अतिरिक्त फारसी, अरबी,उर्दू व अंग्रेजी के भी कई शब्दों को अपनाया गया है जिससे इसकी खूबसूरती में चार चांद लग गये हैं। मैने कभी पढ़ा था कि संविधान में राजभाषा के रूप में देवनागरी हिंदी के स्थान पर हिन्दुस्तानी हिन्दी को लेने की चर्चा हुई थी ताकि वह ज्यादा लोकप्रिय हो सके, यानि वो हिन्दी जो मिश्रण है सारी भारतीय भाषाओं का।

बचपन में पापा ने हिन्दी में समाचार सुनने की आदत डलवाया सुबह 7:20 पर गोरखपुर के आकाशवाणी केन्द्र से 10 मिनट का समाचार प्रसारित होता था, समाचार तो सुनते ही थे ये भी पता चल जाता था कि स्कूल के लिये तैयार होने में कितना समय बचा है।  फिर एक बार रेडियो में शॉर्टवेव की जगह मीडियमवेव लगाया तो बीबीसी न्यूज चैनल लग गया फिर उसको भी सुनने लगे गये, उस पर शाम 7:30 वाले शाम में विश्व की कुछ प्रसिद्ध कहानियों का हिन्दी रूपांतरण सुनाते थे, उसका एक अलग ही अनुभव रहा, अब ये सब नहीं हो पाता।  चलो कोशिश करता हूं कि शायद फिर से ये सब शुरू कर पाए।

मुझे हिन्दी के वर्तमान दशा की अपेक्षा  उसके इतिहास में ज्यादा रूचि है। जब कुछ साल पहले मैने पढा कि चीन में मान सरोवर झील से निकलकर चीन, भारत व पाकिस्तान से बहते हुए अरब सागर में मिलने वाली सिन्धु नदी से हिन्दू,  हिन्दू व हिन्दुस्तान का नाम मिला तो सोचकर ही विस्मित होने लगा कि देखिये कि वो नदी तो वैसे ही बह रही है वहां लाखों सालों से और हमने कितनी सरहदें कितनी लडाईया कितने कत्ल कर लिये इन्ही नामो की वजह से।

दरअसल भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे पहले सभ्यता का विकास सिन्धु नदी के किनारे हुआ, अरब से व्यापार होता था इन लोगों का। अरबों ने सिन्धु नदी के आसपास व  उसके पार के इलाके को सिन्धु के नाम से ही संबोधित करने लगे पर वो उच्चारण में स नही बोल पाते हैं तो स के स्थान पर ह बोलने के कारण हिन्दू (hindu)बोलने लगे इसी से यहां बोली जाने वाली भाषा हिंदी कहलाई, जब ग्रीक लोग हमारी सभ्यता के संपर्क में आये तो वो H गायब कर गये व INDI शब्द का उच्चारण करने लगे,  कालांतर में अंग्रेजों ने India नाम का आविष्कार किया।पर गौर करने वाली बात ये कि एक नदी जो हिमालय से अरब सागर तक का सफर करती है उसे ये पता ही नहीं कि उसका क्या योगदान है। हिन्दुस्तान ही नहीं वेस्टइंडीज, इन्डोनेशिया, इंडियन ओसन का भी नामकरण में उसका ही योगदान है।। 

वैसे हिन्दी के प्रचार प्रसार में बालीवुड व टेलीविजन को योगदान अतुलनीय है,  हिन्दी फिल्में व हिन्दी गानें विदेशी लोगों में काफी लोकप्रिय है। जो ठीक से हिंदी जानते भी नहीं है बडे़ मजे से इनका आनंद लेते हैं।  खेल की दुनिया में कमेन्टरी के लिये अब हिन्दी चैनल ही बना दिये गये हैं। 

हिंदी भाषा मीठी, व्यवहारिक व सरल तो है पर जब अंग्रेजी से भिड़ती  है तो कहीं पिछड़ने सी लगती है,  पढाई व नौकरी के मामले में अंग्रेजी बाजी मार ले जाती है,  सिर्फ हिन्दी जानने वाले लोग पिछड़ जाते हैं।  अंग्रेजी में बात करने वालों के सामने लोग सकपका जाते हैं जवाब देते नहीं बनता, मन में ही लोग अनुवाद करने लगते हैं फिर भी जवाब नहीं दे पाते सिर्फ यस राईट करते रहते हैं। इसका कारण हमारे समाज की उस सोच से है जो सीरत के ऊपर सूरत को रखता है,  ग्यान से ऊपर प्रस्तुति को रखता है।  लोग कितनी भी बातें कर ले पक इस सोच को बदले बिना हिन्दी की प्रतिष्ठा का दायरा ऊपर नहीं उठ पायेगा।